बुधवार, 20 अगस्त 2008

छोटी छोटी मगर मोटी बातें

1- जब हाथ से टूटे न अपनी हथकडी तब मांग लो ताकत स्वयं जंजीर से
जब सृजन के नाम संहार हो तब सृजन का संहार ही भवितव्यहै ।

२-खोल के अपनी मंहगी गठरी सस्ती हॉट लगाओ ।
ये पंक्तिया दिखती तो दार्शनिक हैं लेकिन इनमे व्यवस्था परिवर्तन के लिए आवश्यक रणनीतिक मूल्य भी निहित हैं । आपको क्या लगता है ? है न छोटी छोटी मगर मोटी बातें .......

3 टिप्‍पणियां:

  1. jayprakash ji apki bat pasand ayee.sath hi kisi kavi ki ye laine bhi yad aayi--jab rath kranti ka tham jaye.chintan pr kayee jam jaye to samjho pidi har gayee.purva ko pachhua mar gayee.lage rahiye apne kam me ek din jarur bharat ko bharat ka model milega. bharat me jis din bedo ke mantro ko utara jayega us din apke geeto ka tyohar manaya jayega.apka mitra dhirendra dhirendra pratap singh durgvanshi

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